प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का सच सामने आ गया

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का सच सामने आ गया

शिमला
भारत सरकार की एक रिपोर्ट से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के धरातल पर लागू होने का सच सामने आ गया है। इसके अनुसार डेढ़ लाख लोगों को गोल्डन कार्ड से वंचित रखा गया है। हिमाचल में 10,759 गांवों में से एक भी आदमी के पास गोल्डन कार्ड नहीं है। प्रदेश के करीब 32 प्रतिशत परिवारों ने यह गोल्डन कार्ड ही नहीं बनाए हैं। कार्ड नहीं बनाए जाने से लाभार्थी परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

इस कार्ड से पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। इस बारे में सरकार की ओर से सभी बीडीओ को पत्र लिखा गया है। इस बारे में सभी ग्रामवासियों की ओर से पंचायत प्रधानों को लोगों को जानकारी देने को कहा गया है। राज्य सरकार ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के उपनिदेशकों और परियोजना अधिकारियों की ओर से सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र भिजवाए हैं। खंड विकास अधिकारियों को पंचायतों के प्रधानों और सचिवों से संपर्क करने को कहा गया है, जिससे वे धरातल पर इस योजना को लागू करना सुनिश्चित करें। उन्हें कहा गया है कि यह योजना 23 सितंबर 2018 को लागू हो चुकी है।
राज्य में इस योजना के तहत 4,78,986 परिवार पात्र रहे हैं। योजना के तहत पांच लाख रुपये के निशुल्क इलाज का प्रावधान है। इसके लिए लाभार्थी के पास गोल्डन कार्ड का होना जरूरी होता है। भारत सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक केवल 51 प्रतिशत यानी 10,759 गांव ही ऐसे हैं, जिनमें से एक भी लाभार्थी का गोल्डन कार्ड नहीं बना है। इसकी सूची भी सभी बीडीओ को वेबसाइट से डाउनलोड करने को कहा गया है। साथ ही कहा गया है कि गोल्डन कार्ड लोक मित्र केंद्र में जाकर बनाए जा सकते हैं। कार्ड बनाने के लिए राशन कार्ड और आधार कार्ड जरूरी होते हैं। सभी पात्रों के गोल्डन कार्ड 31 दिसंबर तक बनाने को कहा गया है।

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